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Showing posts from June, 2022

ईश्वर का स्वरुप / God's Form

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'नावेद्रविन्मनुते तं ब्राहान्तम्'  अर्थात जो वेद नहीं जानता वह ईश्वर को नहीं जान सकता| अतः सर्वप्रथम वेदों में ही चल कर देखा जाये | वेद कहता है- 'यस्यामतं तस्य मतं मतं यस्य न वेद सः |   अविज्ञातं विजानतां विज्ञातमविजानताम्’ || अर्थात जो यह समझता है कि ईश्वर समझने का विषय है वह नहीं समझता एवं जो यह समझता है कि ईश्वर समझने का विषय नहीं हैं वह ईश्वर को समझता है | अर्थात ईश्वर को कोई नहीं समझ सकता | दूसरी ओर वेद कहता है- ' इह चेदवेदीदथ सत्यमस्ति न चेदिहावेदीन्महती विनष्टि: ' | अर्थात यदि इसी मानव-देह में ईश्वर को जान लिया, तब तो ठीक है अन्यथा महती हानि हो जाएगी क्योंकि यह मानवदेह देवताओं को भी अप्राप्य है | वेदों ने ईश्वर के न जान सकने के कई कारण बताये हैं | एक कारण तो यह है कि- 'इन्द्रियेभ्यः परा ह्यार्था अर्थेभ्यश्च परं मनः | मनसस्तु परा बुध्दिर्बुद्धेरात्मा महान् परः || महतः परमव्यक्तमव्यक्तात् पुरुषः परः | पुरुषान्न परं किञ्चित सा काष्ठा सा परा गतिः’ || अर्थात इन्द्रियों से परे इन्द्रियों के विषय हैं, विषयों से परे मन है, मन से परे बुद्धि...

जीव का चरम लक्ष्य / ultimate goal of life / الهدف النهائي للحياة

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  विश्व का प्रत्येक जीव बिना किसी प्रयोजन के कोई कार्य नहीं करता, यह एक अनुभवसिद्ध सिद्धांत है | दर्शनशास्त्र कहता है, 'प्रयोजनमनुद्दिश्य मन्दोअपि न प्रवर्तते' अर्थात घोर से घोर मूर्ख भी बिना प्रयोजन के कोई कार्य नहीं करता | अतएव प्रत्येक कार्य का पृथक-पृथक प्रयोजन होना भी स्वाभाविक होना चाहिए, किन्तु ऐसा नहीं है | कार्य अनन्त होते हुए भी प्रयोजन एक ही है | सुनने में यह बात विचित्र सी है किन्तु विचार करने पर साधारण एवं स्वाभाविक है | कुछ लोग कह सकते है की बिना प्रयोजन के भी तो कार्य होते है ; यथा- 'खाल बिनु स्वारथ पर अपकारी',| 'जे बिनु काज दाहिने बायें | अर्थात दुष्ट बिना प्रयोजन के पर-अपकारी होते हैं | इसी प्रकार - 'पर उपकार वचन मन काया | संत सहज सुभाव खगराया || भूर्ज तरु सम संत कृपाला | परहित सेह नित विपति विसाला || ' अर्थात महापुरुष बिना प्रयोजन के परोपकार करता है एवं इसी प्रकार महापुरुषो के आराध्य परात्पर सर्वशक्तिमान भगवान भी बिना प्रयोजन के ही परोपकार करते हैं | इस प्रकार दुष्ट, संत एवं भगवान तीनो ही बिना प्रयोजन कार्य करते हैं | तब उपर्युक्त सिद्धा...